अनंत सिंह एक बार फिर सलाखों के पीछे हैं। इस गिरफ्तारी ने ‘छोटे सरकार’ के सारे समीकरण बदल दिए हैं और उनकी राजनीतिक विरासत को बचाने का जिम्मा एक बार फिर उसी चौखट पर आ गया है, जिसे अनंत ने खुद पर्दे के पीछे धकेल दिया था—उनकी पत्नी, नीलम देवी।

अनंत सिंह की गैर-मौजूदगी में, अब ये तय है कि नीलम देवी ही चुनाव का पूरा मोर्चा संभालेंगी। वह न सिर्फ अपने पति के नाम पर प्रचार करेंगी, बल्कि अगर अनंत सिंह जीतते हैं, तो पर्दे के पीछे से ‘पूरा सिस्टम’ भी वही चलाएंगी। यह एक ऐसी भूमिका है जो उन्होंने पहले भी बखूबी निभाई है। जब-जब अनंत सिंह जेल गए, तब-तब ‘छोटे सरकार’ की पत्नी ने घर से बाहर निकलकर मोकामा की राजनीति, अनंत की संपत्ति और उनके बिजनेस नेटवर्क को भी संभाला है। चाहे पति के लिए प्रचार करना हो या जनता के बीच जाकर वोट मांगना, नीलम देवी यह सब पहले भी करती रही थीं।
जीत का अनुभव और राजनीतिक परीक्षा
नीलम देवी का पहला बड़ा पॉलिटिकल टेस्ट 2019 के लोकसभा चुनाव में हुआ। कांग्रेस ने उन्हें मुंगेर से उम्मीदवार बनाया। RJD के समर्थन के बावजूद वह JDU के ललन सिंह से चुनाव हार गईं, लेकिन 3.60 लाख वोट पाकर उन्होंने अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूती से दर्ज करा दी।

नीलम के राजनीतिक जीवन में असली मोड़ 2022 में आया। जब अनंत सिंह को UAPA मामले में 10 साल की सजा हुई और उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई। मोकामा की गद्दी खाली हुई तो अनंत ने जेल में रहते हुए अपनी पत्नी को अपना उत्तराधिकारी चुना। RJD के टिकट पर नीलम देवी ने मोकामा उपचुनाव लड़ा और BJP की सोनम देवी को हराकर पहली बार विधायक बनकर सदन पहुंचीं।
2025 का उलटफेर और नई जिम्मेदारी
5 साल विधायक रहने के दौरान भी सत्ता का रिमोट कंट्रोल हमेशा ‘छोटे सरकार’ के हाथ में रहा। लेकिन अगस्त 2025 में अनंत UAPA केस में बरी होकर जेल से रिहा हुए, तो उन्होंने मोकामा का राजनीतिक समीकरण बदल दिया।
अनंत ने साफ कर दिया कि 2025 का विधानसभा चुनाव वह खुद लड़ेंगे। उन्होंने अपनी पत्नी को दोबारा चुनाव लड़ाने से इनकार करते हुए कहा, “नहीं। बढ़िया काम नहीं की। जनता से मिली-जुली नहीं।” यह ‘छोटे सरकार’ का अपनी गद्दी पर वापस लौटने का ऐलान था और नीलम देवी को वापस पर्दे के पीछे जाना पड़ा।

लेकिन, अनंत सिंह की ताजा गिरफ्तारी ने उनकी सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया है। जिस पत्नी को उन्होंने ‘काम न करने’ के आधार पर किनारे कर दिया था, आज वही उनकी राजनीतिक सल्तनत को बचाने की सबसे बड़ी (और शायद इकलौती) उम्मीद हैं। नीलम देवी एक बार फिर घर की दहलीज से निकलकर मोकामा की सड़कों पर होंगी, अपने पति का ‘राज’ और ‘सिस्टम’ संभालने के लिए।






